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➡️.....बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका*
Indra Kumar Singh
(UTTAR PRADESH, BARABANKI)
➡️.....बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका*
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Indra Kumar Singh
11 Apr, 2026➡️......बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका* मैहर (बरहिया ग्राम पंचायत) मैहर जिले की ग्राम पंचायत बरहिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले राशन में खुला खेल जारी है। आरोप है कि कोटेदार और उसके कर्मचारी की मिलीभगत से हितग्राहियों को कम तौलकर अनाज दिया जा रहा है। वीडियो में खुली पोल स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डिजिटल युग में भी पुराने तराजू-बांट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, तौल के दौरान कर्मचारी हाथ से कांटा दबाकर वजन कम कर देता है। जिस पल्ले में बांट रखा है, उसे ठीक से उठाया तक नहीं जाता—यानी तौल की पूरी प्रक्रिया ही संदिग्ध है। डर के साये में गरीब हितग्राही सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद गरीब हितग्राही विरोध नहीं कर पा रहे हैं। कारण चाहे डर हो या निर्भरता, लेकिन उनके हक का अनाज दिनदहाड़े छीना जा रहा है। नाप-तौल विभाग की चुप्पी पर सवाल इस पूरे मामले में नाप-तौल विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग का काम है बाजारों, दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों की जांच करना, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी लगभग शून्य नजर आती है। क्या विभाग केवल कागजों तक सीमित रह गया है? क्या अधिकारियों को ग्रामीण इलाकों की सुध लेने की फुर्सत नहीं? बड़ा सवाल: जब सरकार पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था की बात करती है, तो आखिर जमीनी स्तर पर यह लापरवाही और भ्रष्टाचार क्यों? मांग: स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों का हक सुरक्षित रह सके।