एक सप्ताह से टूटा पड़ा जैठोर पुल का बैरियर, प्रशासन बेखबर! बढ़ा बड़े हादसे का खतरा भारी वाहनों की एंट्री रोकने वाला सुरक्षा कवच हुआ ध्वस्त, जर्जर सड़क और जलभराव ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें; ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण जैठोर पुल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए लगाया गया लोहे का बैरियर अज्ञात वाहन की टक्कर से टूटे हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक उसे बदलने या मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठा सका है। प्रशासन की इस उदासीनता ने पुल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र नया बैरियर नहीं लगाया गया तो प्रतिबंधित भारी वाहन कभी भी पुल पर प्रवेश कर सकते हैं। पुल की पहले से कमजोर स्थिति को देखते हुए यह लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ज्ञात हो कि जैठोर पुल के एक पिलर में तकनीकी खराबी आने और उसके धंसने के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इस पुल से भारी वाहनों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसी उद्देश्य से पुल के दोनों छोर पर मजबूत लोहे के बैरियर लगाए गए थे, ताकि केवल हल्के वाहनों का आवागमन हो सके। लेकिन लगभग एक सप्ताह पूर्व एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक ओर का बैरियर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद अब तक न तो नया बैरियर लगाया गया और न ही कोई वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था की गई। स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना रही है पुल के समीप मुख्य सड़क की बदहाल हालत। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से दोपहिया और छोटे चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालक जान जोखिम में डालकर गड्ढों से बचते हुए पुल पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टूटा बैरियर और जर्जर सड़क मिलकर किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकते हैं। जैठोर पुल बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन का एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में बरती जा रही लापरवाही यात्रियों और स्थानीय लोगों की चिं