बगहा। अरवल सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद हुए हंगामे और सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर प्रसाद के साथ मारपीट की घटना के विरोध में बुधवार को पूरे बिहार में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। इसका असर उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में भी देखने को मिला, जहां ओपीडी पूरी तरह बंद रही। ओपीडी बंद रहने से अस्पताल का पंजीकरण काउंटर भी बंद रहा। 30 से 35 किलोमीटर दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों से इलाज, बच्चों के टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि, चिकित्सकों ने मानवता के आधार पर इमरजेंसी सेवाएं जारी रखीं और गंभीर मरीजों का उपचार किया। बिहार हेल्थ सर्विस एसोसिएशन के तिरहुत प्रमंडल सचिव डॉ. विनय कुमार ने कहा कि अरवल सदर अस्पताल में हुई हिंसा के दौरान सिविल सर्जन के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से आरोपियों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इसी के विरोध में राज्यभर के डॉक्टरों ने एक दिन के लिए ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी हैं और गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विरोध चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। साथ ही भरोसा दिलाया कि गुरुवार से ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएंगी।