पश्चिमी चंपारण। जिले के बगहा नगर स्थित मदरसा जामिया हारुनिया यतीम खाना मोइनिया में शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद चार बच्चों की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान बच्चों के सिर पर पगड़ी बांधकर उन्हें हाफिज-ए-कुरआन की उपाधि से नवाजा गया। मदरसे की ओर से सभी बच्चों को सनद यानी प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। दस्तारबंदी कराने वाले बच्चों में सलमान अंसारी, साबिर अंसारी, सफदर अंसारी और अरमान अंसारी शामिल हैं। इन चारों बच्चों ने कुरआन शरीफ के सभी तीस पारे कंठस्थ कर यह उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने खुशी जाहिर की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मदरसे में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद सदर मदारिस मौलाना अब्दुल वहाब कासमी ने की। उन्होंने कहा कि कुरआन शरीफ के तीसों पारे जुबानी याद करने वाले को हाफिज कहा जाता है। बच्चों की मेहनत, लगन और उपलब्धि के सम्मान में उनकी दस्तारबंदी की गई है। उन्होंने मदरसे को सहयोग देने वाले लोगों के प्रति आभार जताया और उनकी कमाई में बरकत की दुआ की। कार्यक्रम में पूर्व सभापति प्रतिनिधि सह अधिवक्ता फिरोज आलम भी शामिल हुए। उन्होंने बच्चों को सहयोग राशि प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया। फिरोज आलम ने कहा कि यतीमखाने में गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। यहां बच्चों की पढ़ाई मुस्लिम समुदाय के लोगों के सहयोग और चंदे से संचालित होती है। उन्होंने कहा कि दुनियावी शिक्षा के साथ दीनी तालीम भी जरूरी है। साथ ही समाज के लोगों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जरूरतमंद बच्चों की मदद करने की अपील की। कार्यक्रम में मौलाना जुबैर आलम, हाफिज शमसुल होदा, नाजिम साबिर अली, मो. गयासुद्दीन, मोबिन अंसारी, तुफैल अहमद, मो. राशिद, कारी कलीमुल्लाह, मौलाना नुरुल होदा कासमी, मौलाना खालिद कासमी और आलमगीर रब्बानी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। यह आयोजन बच्चों की मेहनत को सम्मान देने के साथ शिक्षा, सामाजिक सहयोग और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देता है।