बगहा। नगर परिषद की कचरा निस्तारण व्यवस्था की लापरवाही अब बेजुबान पशुओं की जान पर भारी पड़ने लगी है। शहर के कचरे के साथ कथित तौर पर अस्पताल की दवाएं खुले में फेंके जाने का मामला सामने आया है। एकनंबरा नहर के समीप फेंके गए कचरे में बारिश का पानी जमा था। आरोप है कि दवाओं के संपर्क में आए इस पानी को पीने से चार भैंसों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य भैंस को उपचार के बाद बचा लिया गया। घटना के बाद पशुपालकों में आक्रोश है। वहीं, नगर परिषद की सफाई व्यवस्था और कचरा उठाव करने वाली एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मृत भैंसों में वार्ड संख्या 31 के अहिरानी टोला निवासी मुकेश यादव की तीन और कन्हैया यादव की एक भैंस शामिल है। पशुपालक रामाशीष कुमार ने बताया कि वे अपनी भैंसों को चराने के लिए एकनंबरा नहर के समीप गए थे। वहां नगर परिषद की ओर से कचरे के साथ कुछ दवाएं भी फेंकी गई थीं। बारिश के बाद दवाओं के संपर्क में आए पानी को भैंसों ने पी लिया। इसके बाद कन्हैया यादव की एक भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। घर लौटने के दौरान अन्य भैंसों की भी तबीयत बिगड़ने लगी। सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बीमार पशुओं का उपचार किया। हालांकि, चार भैंसों को नहीं बचाया जा सका। एक अन्य भैंस की जान बचा ली गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद का निर्धारित डंपिंग स्थल औसानी में होने के बावजूद सफाई एजेंसियां अन्य जगहों पर कचरा फेंक रही हैं। लोगों ने दास एंड कंपनी और साज ट्रेडर्स पर भी मनमाने तरीके से कचरा गिराने की शिकायत की है। खुले में अस्पताल का कचरा फेंके जाने से पशुओं के साथ आसपास के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी खतरा मंडरा रहा है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी एजेंसी पर कार्रवाई होगी। वहीं, पशु चिकित्सक डॉ. सुधीर कुमार ने प्रथम दृष्टया जहरीला पदार्थ खाने से मौत की आशंका जताई। उन्होंने बताया कि विभाग में पशुओं की मौत पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। इधर, पशुपालकों ने नगर परिषद से उचित क्षतिपूर्ति की मांग की है।